सागर फिल्म रिलीज हुई थी 1985 मे और ऑस्कर के लिये उस साल की भारत की तरफसे ऑफिशियल एंट्री भी बनी थी ! आप को जानकर हैरानी होगी के इस फिल्म को निर्देशित किया था शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पीने ! बॉबी फिल्म के बाद राजेश खन्ना से शादी कर फिल्मोसे सन्यास ले चुकी डिम्पल कपाडिया की ये कमबॅक फिल्म थी ! डिम्पल , ऋषी कपूर और कमल हसन की एक दुसरे से दोस्ती और प्यार के वजहसे होने वाली उलझने सागर फिल्म की कहानी को दिलचस्प बनाते है ! इस फिल्म के गीतकार जावेद अख्तर है ,संगीतकार है राहुलदेव बर्मन और जिस गाने का आज जिक्र होगा उसे गाया है किशोर कुमारने !
गाने की सिच्युएशन कुछ ऐसी है , नायक ने नायिका को एक मेले के दौरान देखा है और उसको वो पसंद भी आगयी है [ क्यू न हो? हम बात 1985 के डिम्पल की कर रहे है जनाब]! अब उसे बात आगे बढानी है मगर वह नायिका को जानता तो है नही, तो अब उसने गाने के सहारा लिया है, गाने के बहाने वह नायिका की तारीफोके पुल बांध रहा है और बातो ही बातो मे अपने दिलका पैगाम भी पहुंचा रहा है ! और नायिका है के सबकुछ जानकर अंजान बनी, गानेका लुफ्त उठा रही है ,अब ये कौशल तो कोई सुंदर युवतीयोसे सीखे , किसीने सच कहा है , हुस्न खुदा देता है मगर अदाये अपने आप आ जाती है ! खैर चलिये गाने की तरफ मुडते है ! मुखडा कुछ् ऐसा है
चेहरा है या चाँद खिला है,
जुल्फ घनेरी शाम है क्या
सागर जैसी आँखोंवाली
ये तो बता तेरा नाम है क्या?
क्या कहने जावेद साब ,चेहरे को चांद, और निली आखोंको सागर काफी लोगोने कहा है मगर "घनेरी श्याम" बहोतही सटीक वर्णन है ! इस गानेकी एक और सुंदरता बताऊ इसमे जो गिटार बजता है ना मालिक , बहुतही बढिया बजता है ! कभी हो सके तो इस गाने को "instrumental" पे सुनियेगा , मेरी बात पे फौरन यकीन आ जायेगा ! आईये आगे बढे , पहिला अंतरा देखते है
तू क्या जाने तेरी खातिर
कितना है बेताब ये दिल
तू क्या जाने देख रहा
है कैसे कैसे ख्वाब ये दिल
लो करलो बात , यहा लडकी के नाम का पता नही और इन्होने खाब देखनेभी सुरु किये, अब आदमी इश्क और प्यार पे पडता है तो ऐसे होना तो लाजमी है , चलिये जानतो ले कैसे खाब है आशिक के,
दिल कहता है,
तू है यहा तो
जाता लम्हा थम जाये
वक्त का दरया बहते
बहते इस मंज़र में जम जाये
वाह वाह जी , नायक चाहता है की बस वक्त यही ठहर जाये , वो सामने हो , ये गाता रहे , प्यार जताता रहे , मैफिल सजी रहे ! सही है भाई , क्या पता वो उसे मिले न मिले , पसंद करे न करे , इससे अच्छा"जाता लम्हा थम जाये"! मगर वक्त किसीके लिये रुका है जनाब , चलिये आगेकी चार लाईने देखते है
तू ने दीवाना दिल को बनाया,
इस दिल पर इल्ज़ाम है क्या
सागर जैसी आँखोंवाली
ये तो बता तेरा नाम है क्या?
देखोजी दुनिया का दस्तूर अब दिवाने बने ये, लेकिन दोष उसका है , भई दावत देके थोडेही बुलाया था आपको, लेकिन प्यार सौ खून माफ होते है जी , ये झुठे इल्जाम क्या चीज है ? ! तो अगले अंतरे की तर्फ चलते है !
आज मैं तुझ से दूर
सही और तू मुझ से अन्जान सही
तेरा साथ नहीं पाऊ तो
खैर तेरा अरमान सही
भई गीतकार को दाद फिरसे बनती है , तेरा साथ नहीं पाऊ तो खैर तेरा अरमान सही जैसी बडी बात "' कितनी सहजता से कह गये , सही तो है साहब , सारी पसंद आयी हुई चीजे मिलती थोडी है इस दुनियामे ? लेकिन नाराज ना होकर "अरमान" दिल मे रख आगे बढने मे क्या हर्ज है ? हम भी आगे बढते है , गाना देखिये
ये अरमान है, शोर नहीं हो खामोशी के मेले हो
इस दुनियाँ में कोई
नहीं हो, हम दोनो ही अकेले हो
यहा पे मै इस गाने की धून की विशेषता की तरफ आपका ध्यान लाना चाहुंगा , इस गाने अंतरे के पहली चार पंक्तीया किशोरजी धीरेसे गाते है और फिर एकदम से फिर एकदम उंचा सूर पकड लेते है ! राहुलदेव बर्मन यानेके पंचमदा की यही बात उनको बेमिसाल बनाती है , किशोर कुमार तो नायब है ही ! आईये गाने के अंत की तरफ बढते है
तेरे सपने देख रहा
हूँ, और मेरा अब काम है क्या
सागर जैसी आँखोंवाली
ये तो बता तेरा नाम है क्या?
तेरे सपने देख रहा हुं , और मेरा अब काम है क्या ? सच ही तो है , कभी कभी सपने इतने रंगीन होते है और इतने सच्चे लगते है के और कोई काम सुझता ही नही और "अच्छे दिनोके" आने की राह लोग हररोज देखते है ! लेकिन जनाब सपने तो उन्ही के सच होते है जो उसे देखने की हिम्मत रखते है ! तो सपने जरूर देखिये लेकिन जागीये और अपने सपनो को सच बनाने के लिये पुरी शिद्द्त से जुट जाईये , तभी सागर जैसी आखोवाली के साथ सागर किनारे दिल ये पुकारे वाला भी गाणं नसीब होगा ! समझे ? नही समझे तो अगले हप्ते फिर जनहित मे जारी करेंगे कुछ् और बाते , तब तक के लिये नमस्कार !
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